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कूरेभार थाना समाधान दिवस में पहुंचीं 29 शिकायतें, तहसील अधिकारियों की अनुपस्थिति से कई मामलों का नहीं हो सका निस्तारण

सुलतानपुर। जिले के कूरेभार थाना परिसर में शनिवार को आयोजित थाना समाधान दिवस में कुल 29 शिकायतें दर्ज की गईं। समाधान दिवस की अध्यक्षता वरिष्ठ उपनिरीक्षक राजेश कुमार यादव ने की। उन्होंने फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को मामलों का समयबद्ध एवं निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। हालांकि, राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण कई मामलों का मौके पर समाधान नहीं हो सका, जिससे शिकायत लेकर पहुंचे लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ा।

थाना समाधान दिवस का उद्देश्य पुलिस और राजस्व विभाग के संयुक्त समन्वय से भूमि विवाद, कब्जा, सीमांकन और अन्य स्थानीय समस्याओं का त्वरित निस्तारण करना होता है। लेकिन शनिवार को आयोजित समाधान दिवस में तहसील स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति ने इस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए। कई फरियादी उम्मीद लेकर पहुंचे थे कि उनकी समस्याओं का उसी दिन समाधान हो जाएगा, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समाधान दिवस में सभी संबंधित विभागों के अधिकारी नियमित रूप से उपस्थित रहें तो लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की मांग भी की।

शनिवार को आयोजित थाना समाधान दिवस में विभिन्न प्रकार की कुल 29 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें भूमि विवाद, राजस्व संबंधी प्रकरण, आपसी विवाद तथा अन्य स्थानीय समस्याएं प्रमुख रहीं। वरिष्ठ उपनिरीक्षक राजेश कुमार यादव ने सभी फरियादियों की समस्याओं को एक-एक कर सुना और संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष एवं समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समाधान दिवस का उद्देश्य लोगों को उनकी समस्याओं के समाधान के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराना है, जहां पुलिस और राजस्व विभाग मिलकर मामलों का त्वरित निस्तारण कर सकें।

समाधान दिवस में राजस्व विभाग की ओर से केवल कानूनगो राम अनुज और लेखपाल राधेश्याम शुक्ला उपस्थित रहे। जबकि तहसील स्तर के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण राजस्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों का मौके पर निस्तारण नहीं हो पाया।

भूमि विवाद और सीमांकन जैसे मामलों में उच्च राजस्व अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में निर्णय या आवश्यक कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है। उनकी अनुपस्थिति के चलते कई शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई संभव नहीं हो सकी।

समाधान दिवस में बड़ी उम्मीद लेकर पहुंचे कई लोगों को तब निराशा हाथ लगी, जब उनके मामलों का मौके पर समाधान नहीं हो सका। कई फरियादियों ने बताया कि वे इस उम्मीद से आए थे कि पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त उपस्थिति में उनकी समस्या का निस्तारण हो जाएगा, लेकिन आवश्यक अधिकारियों के न होने से उन्हें दोबारा आने की सलाह दी गई।

ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से समय और आर्थिक दोनों तरह की परेशानी होती है। ऐसे में समाधान दिवस का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब सभी संबंधित अधिकारी निर्धारित समय पर उपस्थित रहें।

स्थानीय लोगों के अनुसार थाना समाधान दिवस की शुरुआत आम नागरिकों को त्वरित न्याय और प्रशासनिक राहत देने के उद्देश्य से की गई थी। इस व्यवस्था में पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से बैठकर शिकायतों का मौके पर समाधान करते हैं, जिससे विवाद लंबे समय तक लंबित न रहें।

हालांकि, लोगों का आरोप है कि कई बार जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण समाधान दिवस केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है। यदि आवश्यक अधिकारी उपस्थित नहीं रहते तो अधिकांश शिकायतों को अगली तारीख या संबंधित कार्यालय भेज दिया जाता है, जिससे लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर जाता है।

ग्रामीणों और फरियादियों ने प्रशासन से मांग की है कि थाना समाधान दिवस में पुलिस के साथ-साथ राजस्व विभाग के सभी जिम्मेदार अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि सभी विभागों के अधिकारी एक ही स्थान पर मौजूद रहेंगे तो अधिकांश मामलों का तत्काल समाधान संभव होगा। लोगों ने यह भी कहा कि समाधान दिवस की नियमित निगरानी होनी चाहिए और अधिकारियों की अनुपस्थिति पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इससे इस व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।

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Suyash Chitranshi
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